करुणात्रिपदी
॥ करुणात्रिपदी ॥– श्रीमद्वासुदेवानन्द सरस्वती स्वामी विरचित १शांत हो श्रीगुरुदत्ता। मम चित्ता शमवी आता।।ध्रु।।तू केवळ माता जनिता। सर्वथा तू हितकर्ता।।तू आप्तस्वजन भ्राता। सर्वथा तूचि त्राता।।भयकर्ता तू भयहर्ता। दंडधर्ता तू परिपाता।तुजवाचुनि न दुजी वार्ता। तू आर्ता आश्रय दत्ता (आश्रयदाता) ।।शांत हो । शांत हो श्रीगुरुदत्ता…… ।।१।। अपराधास्तव गुरुनाथा। जरि दंडा धरिसी यथार्था।।तरि आम्ही गाउनि गाथा। तव […]



